Complaint

आयोग के बारे में

 

  

जरूरतमंद पीड़ितों को सहायता पहुचाने की दृष्टि से मध्यप्रदेश में सितम्बर, १९९५ में मानव अधिकार आयोग का गठन किया गया। मध्यप्रदेश, मानव अधिकार आयोग का गठन करने वाले अग्रणी राज्यों मे से एक है। मध्यप्रदेश  मानव अधिकार आयोग, मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के लिए कार्य करता है। 

 

आयोग की स्थिति अपने आप में स्वायत्तशासी है। वह अपने सदस्यों की नियुक्ति, उनके कार्यकाल का निर्धारण, स्टाफ तथा अनुसंधान दल की जिम्मेदारियॉं और आचरण तय करता है। आयोग की वित्तीय स्वायत्ता अधिनियम की धारा ३३ में निहित है।

 

आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रदेश के राज्यपाल चयन समिति की अनुशंसा पर करते हैं। चयन समिति के अध्यक्ष मुखयमंत्री होते हैं और विधानसभा अध्यक्ष, गृहमंत्री और नेता प्रतिपक्ष इस समिति के सदस्य होते हैं। 

 

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग की शाखायें:-

 

(अ) विधि शाखा-इस शाखा के प्रभारी रजिस्ट्रार(लॉ) होते हैं ।  यह शाखा आयोग द्वारा लम्बित एवं निर्णीत प्रकरणों के दस्तावेजों के संधारण के लिए उत्तरदायी हैं। यह शाखा आयोग के आदेशों को संबंधित प्राधिकारी को सूचित करने का कार्य करती है। साथ ही आयोग के आदेश पर हुई सभी कार्यवाहियों या प्रतिवेदनों को आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को प्रस्तुत करती है। 

 

(ब) अनुसंधान शाखाः- इस शाखा के प्रभारी ऐसे अधिकारी होंगे जो महानिरीक्षक,पुलिस की श्रेणी से नीचे के  न हों । ऐसी पुलिस एवं अन्वेषणकर्ता कर्मचारी तथा ऐसे अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी इस शाखा में होते हैं, जो राज्य आयोग के कार्यों का कुशलता पूर्वक निष्पादन करतें हैं।

 

 (स) प्रशासन शाखाः- यह शाखा सामान्य प्रशासन के प्रबंधकीय यथा स्थापना, भण्डार/ क्रय और लेखा संबंधित सभी कार्य संपादित करती है। 

 

(द) सूचना एवं जनसम्पर्क शाखा- यह शाखा मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिये जनसंचार के दृश्य-श्रृव्य माध्यमों, वेबसाइट, और विभिन्न प्रकाशनों तथा प्रेरक सामग्रीयों के माध्यम से कार्य करती है।