Complaint

आयोग मित्र योजना

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग

पर्यावास भवन, खण्ड-1, प्रथम तल, भोपाल

भोपाल,दिनांक 23 मार्च, 2006

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मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग मित्र शिकायत

प्रकोष्ठ संचालन स्कीम

 

मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 10 की उप धारा (2) सपठित म. प्र. राज्य मानव अधिकार आयोग (प्रक्रिया) विनियम, 1986 के विनियम 4 की उप कंडिका (13) तथा धारा 12 एवं 13 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग अपने कार्य के विस्तार एवं उसे सुचारू रूप से मध्यप्रदेश राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित करने के उद्देश्य से आयोग मित्र शिकायत प्रकोठों की स्थापना कर, उनकी कार्यप्रणाली निर्धारित करने हेतु निम्नानुसार स्कीम बनाता हैः-

 

1. यह स्कीम ‘मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग मित्र शिकायत प्रकोष्ठ संचालन स्कीम’ कहलाएगी।

2. यह स्कीम 1 अप्रैल, 2006 से प्रवृत्त होगी।

3. इस स्कीम में प्रयुक्त निम्नलिखित शब्दों का अर्थ एतदनुसार समझा जाएगाः-

 

A. ‘आयोग’ से तात्पर्य मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा के अधीन गठित मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग से है।

B. ‘अधिनियम’ से तात्पर्य मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 से है।

C. “आयोग मित्र” से तात्पर्य ऐसे चरित्रवान, निष्पक्ष, गैर-राजनीतिक,  समाज सेवी, प्रतिष्ठित व्यक्ति से है- जिन्हें बिना किसी वेतन/ पारिश्रमिक/मानदेय के आयोग द्वारा अधिनियम के अन्तर्गत प्रदत्त दायित्वों के निर्वहन हेतु नियुक्त किया जाए।

D. ‘शिकायत प्रकोष्ठ’ से तात्पर्य मध्यप्रदेश के विभिन्न महानगरों, नगरों, जिलों, तहसीलों एवं ग्रामों में ऐसे किसी भी निर्दिष्ट स्थान, वास या कार्यालय से है, जहां से आयोग द्वारा अधिनियम में दिये गये दायित्वों का निर्वहन करने के लिए, आयोग मित्रों की मदद ली जा रही हो।

E. इस स्कीम में प्रयुक्त ऐसे शब्दों, जो यहां परिभाषित नहीं हैं, किन्तु अधिनियम में परिभाशित हैं, का वही अर्थ लगाया जाएगा, जो अधिनियम के प्रयोजनों हेतु लगाया जाना विहित है।

 

4. आयोग, शिकायत प्रकोष्ठों के लिए आयोग मित्रों की नियुक्ति स्वविवेक से अपनी जानकारी के आधार पर करेगा। इस हेतु आयोग संबंधित जिले में उच्च पदस्थ शासकीय अधिकारियों से परामर्श कर सकेगा।

5. सामान्यतः महानगरों में आयोग मित्रों की संख्या कम से कम 5 एवं अधिकतम 11, नगरों में कम से कम 3 एवं अधिकतम 5, जिला मुख्यालयों में कम से कम 2 एवं अधिकतम 5 तथा तहसील मुख्यालयों एवं ग्रामों में कम से कम 1 या अधिकतम 3 रहेगी।

6. आयोग मित्र का कार्यकाल नियुक्ति की तिथि से 2 वर्ष का रहेगा। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि 2 वर्ष या उससे कम अवधि के लिए आयोग द्वारा बढ़ायी भी जा सकेगी, किन्तु दो वर्ष की कालावधि के बाद समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित, अनुभवी और सेवाभावी नागरिकों का सहयोग प्राप्त करने की दृष्टि से आयोग नये आयोग मित्रों की नियुक्ति कर सकेगा।

7. आयोग आवश्यकतानुसार आयोग मित्र का कार्यकाल अपने विवेक से कम कर सकेगा या समापत कर सकेगा।

8. शिकायत प्रकोष्ठों में कार्यरत आयोग मित्र न तो आयोग के कर्मचारी और न ही अनुबंधित सेवक माने जायेंगे। शिकायत प्रकोष्ठ अपने कार्य के निर्वहन के लिए यदि किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों की सेवाएं लेते हैं, तो वे ऐसे व्यक्ति न तो आयोग के कर्मचारी और न ही उसके अधीनस्थ सेवक मानपे जावेंगे।

9. आयोग मित्रों से आयोग द्वारा निम्न वर्णित स्वरूप की सहायता की अपेक्षा रहेगीः-

 

A. शिकायत प्रकोष्ठ के माध्यम से आयोग को सहायता पहुंचाने हेतु आयोग मित्रों की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका यह रहेगी कि वे मानव अधिकारों एवं कर्त्तव्यों के संबंध में जनमानस में जागरूकता उत्पन्न करेंगे। साथ ही वे मानव अधिकारों के उल्लंघन से पीड़ित व्यक्तियों को अधिनियम के अन्तर्गत उपलब्ध न्याय माध्यमों की जानकारी देंगे तथा पीड़ित व्यक्तियों को उन माध्यमों तक पहुंचाने में मार्गदर्शन एवं सहयोग देंगे।

B. आयोग मित्र मानव अधिकारों और कर्त्तव्यों संबंधी जनमानस में जागरूकता उत्पन्न करने एवं सामान्य नागरिकों को उस संबंध में शिक्षित करने हेतु आयोग के निर्देशों एवं पूर्वानुमति से समय-समय पर मानव अधिकारों और कर्त्तव्यों संबंधी विविध विषयों पर संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएं, सभाएँ एवं सम्मेलन आयोजित करेंगे। इस हेतु आयोग अपनी आर्थिक सीमाओं के अन्तर्गत आयोग मित्रों को वित्तीय सहायता एवं साहित्य सामग्री उपलबध करायेगा।

C. आयोग मित्रों से यह भी अपेक्षा रहेगी कि वे उनके क्षेत्र में उनकी जानकारी में आए विभिन्न मानव अधिकार संबंधी विषयों पर समुचित सामाजिक अध्ययन करने के उपरान्त आयोग को अपने सुझाव प्रेषित करेंगे, ताकि तत्संबंधी विषयों पर आयोग अधिनियम के अन्तर्गत आवश्यक कार्यवाही कर सके।

D. आयोग के लिखित आदेशों एवं निर्देशों पर आयोग-मित्र, समय-समय पर मानव अधिकारों एवं उनके उल्लंघन के संबंध में स्थल निरीक्षण करेंगे एवं जाँच कर अपनी रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करेंगे। जहां किसी गम्भीर या आपातकालीन स्थिति में तुरन्त कार्रवाई करना अपेक्षित हो तथा स्थल निरीक्षण या जाँच करने के लिए आयोग से लिखित आदेश प्राप्त करने में विलम्ब से जनहानि की आशंका हो, वहां आयोग के अध्यक्ष या उनकी अनुपस्थिति में आयोग में उपलबध वरिष्ठतम सदस्य के मौखिक आदेश पर आयोग मित्र स्थल निरीक्षण या जाँच कर अपना प्रतिवेदन आयोग को प्रस्तुत कर सकेंगे। इन परिस्थितियों में अध्यक्ष या सदस्य, जैसी भी स्थिति हो स्थल निरीक्षण या जाँच की स्वीकृति देने के पश्चात उस संबंध में एक शिकायत आदेश पारित र उसे आयोग के रिकार्ड में सुरक्षित रखेंगे।

 

10. इस स्कीम के अतिरिक्त आयोग समय-समय पर आवश्यकतानुसार आयोग मित्रों को शिकायत प्रकोष्ठों में कार्यवाही सुचारू रूप से संचालन करने हेतु अतिरिक्त निर्देश दे सकेगा, जिनको आयोग मित्रों को पालन करना आवश्यक होगा।

11. अधिनियम के अन्य समस्त उपबन्ध इस स्कीम में निर्धारित प्रक्रिया को भली-भांति समझने के लिए उसके अंश के रूप में पढ़े जाएंगे।

12. इस स्कीम में पयुक्त ‘शब्द’ या ‘भाषा’ के अर्थ के संबंध में यदि कोई शंका या विवाद उपस्थित हो, तो उस पर आयोग का निर्णय अन्तिम एवं बंधनकारी होगा।

13. इस स्कीम को आयोग कभी भी संशोधित या रद्द कर सकेगा।

 

 

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के

आदेशानुसार,

(एस. रावला)

प्रमुख सचिव